ज्ञान अर्थशास्त्र का विकास - 1
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| कार्ल मार्क्स, 1818-1883 |
प्रस्तुतीकरण की पद्धति और जांच-पड़ताल की पद्धति के बीच फर्क को रेखांकित करते हुए मार्क्स ने खुद लिखा था , “ दरअसल, प्रस्तुतीकरण की पद्धति को जांच-पड़ताल की पद्धति से निश्चय ही स्वरूप में भिन्न होना चाहिए । जांच-पड़ताल के दौरान सामग्री को विस्तार में ग्रहण करना होता है, विकास के विभिन्न रूपों का विश्लेषण करना पड़ता है, उनके अन्दरूनी सम्बन्धों की खोजबीन करनी पड़ती है । इस कार्य के संपन्न होने के बाद ही वास्तविक गति का यथेष्ट वर्णन किया जा सकता है । यदि यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया जाए, दर्पण में प्रतिबिम्बित छवि की तरह यदि विषयवस्तु का जीवन आदर्श रूप में प्रतिबिम्बित हो जाए, तो ऐसा प्रतीत हो सकता है जैसे हमारे सामने महज एक पूर्व-अपेक्षित ( निगमनिक ) रचना ही है।”
ग्रुंड्रिसे में हम जहाँ जांच-पड़ताल की पद्धति का साक्षात करते हैं, वहीं पूंजी में प्रस्तुतीकरण की पद्धति का । ग्रुंड्रिसे में जांच-पड़ताल जहाँ समाप्त होती है, पूंजी का प्रस्तुतीकरण वहीं से आरम्भ होता है ।
ग्रुड्रिसे ( नोटबुक VII ) के लगभग अन्त में मार्क्स बुर्जुआ सम्पत्ति की पहली श्रेणी के रूप में ‘माल’ की चर्चा करते हैं और पूंजी का पहला अध्याय ‘माल’ से ही शुरू होता है । .... अपनी अन्य रचना थ्योरी ऑफ सरप्लस वैल्यू में वे उन दिनों राजनीतिक अर्थशास्त्र के क्षेत्र में प्रचलित विभिन्न विचारशाखाओं की आलोचना के क्रम में अपनी अवधारणाओं की विवेचना करते हैं और उन्हें पर्याप्त विस्तार देते हैं ।
जांच-पड़ताल के दौरान, जाहिर है, पूंजी के विकास के विभिन्न विकल्पों का जायजा लिया जाता है, जबकि प्रस्तुतीकरण के दौरान सबसे उपयुक्त ( लगनेवाले ) विकल्प को छोड़कर अन्य विकल्पों को प्रायः नजरअंदाज कर दिया जाता है । मानव मस्तिष्क की भी यही कार्यप्रणाली है । वैसे मार्क्स उपर्युक्त अंशों में वर्णित विश्लेषणों को सार रूप में पूंजी में भी जारी रखते हैं ।
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| लियोन वालरा, 1834-1910 |
बहरहाल, पूंजी के अतिक्रमण के रूप में विकसित मार्क्स का समाजवाद तब प्रचलित फ्रांसीसी समाजवाद और कम्युनिज्म की समालोचना की प्रक्रिया में अस्तित्व में आया था । मार्क्स के समय प्रचलित फ्रांसीसी समाजवादी तथा कम्युनिस्ट विचारशाखाएँ नैतिक और विभिन्न सतही आधारों पर पूंजी की आलोचना करती थीं । राइनिश जाइटुंग का सम्पादन करने के क्रम में ( 1842-43 में ही ) मार्क्स ने यह महसूस किया था कि इन फ्रांसीसी प्रवृत्तियों की सारवस्तु के बारे में निर्णयात्मक रूप से कुछ कह पाना राजनीतिक अर्थशास्त्र के अध्ययन के बिना मुमकिन नहीं था और इसी तरह वे राजनीतिक अर्थशास्त्र के अध्ययन की ओर प्रवृत्त हुए । फ्रांसीसी समाजवाद तथा कम्युनिज्म की आलोचना को उन्होंने इस प्रकार राजनीतिक अर्थशास्त्र के अपने अध्ययन के साथ जोड़ दिया । यह उनके समाजवाद का विशिष्ट संदर्भ था ।
मार्क्स ने एक ओर औद्योगिक-पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली को एक प्रगतिशील ऐतिहासिक युग की महिमा प्रदान की, वहीं दूसरी ओर उसकी गति-प्रकृति, उसके अन्दरूनी अन्तरविरोधों के विश्लेषण के जरिए उसके अतिक्रमण के रूप में समाजवादी-साम्यवादी उत्पादन प्रणाली की अवधारणा भी पेश की । ..........
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| विलियम जेवोंस, 1835-1882 |
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| कार्ल मेंगर, 1840-1921 |
( जारी )




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